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पतंजलि गुरुकुलम् के नवीन परिसर का भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम भव्यता-दिव्यता से सम्पन्न

-पतंजलि गुरुकुलम् का उद्देश्य दिव्य व भव्य व्यक्तित्व निर्माण करना है

-हमारी वेद परम्परा, ऋषि परम्परा, ऋषि संस्कृति, योग व अध्यात्मवाद को भौतिकवाद से अधिक गौरव मिलना चाहिए

-पतंजलि गुरुकुलम् के नन्हें विद्यार्थी हमारे लिए प्रेरणा बन गए 

आपकी आवाज़, ब्यूरो
हरिद्वार। पतंजलि गुरुकुलम् के नवीन परिसर का भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्ष्णी पीठाधीश्वर गुरु शरणानंद महाराज के कर-कमलों से सम्पन्न हुआ। यह दो चरणों में पूरा होगा जिसमें प्रथम शनिवार को पतंजलि कन्या गुरुकुलम् के भवन का शिलान्यास किया गया। सर्वप्रथम वैदिक मंत्रेेच्चारण के साथ भूमिपूजन किया गया जिसमें सभी शीर्ष संतों ने नींव की ईंट लगाकर दिव्य-भव्य भवन निर्माण की अनुमति प्रदान की। तदोपरान्त दीप प्रज्जवलन के बाद उपस्थित महानुभावों को एक कलात्मक 3-डी चलचित्र के माध्यम से पतंजलि गुरुकुलम् के नवीन परिसर की झलक प्रस्तुत की गई।
इस अवसर पर स्वामी रामदेव महाराज ने कहा कि लगभग 500 करोड़ की लागत से बन रहे इस भवन में भारत के गौरवशाली इतिहास व गुरुकुल परम्परा के दर्शन होंगे, जहाँ एक ओर दिव्यता होगी तथा दूसरी और भव्यता। उन्होंने कहा कि पतंजलि गुरुकुलम् का उद्देश्य दिव्य व भव्य व्यक्तित्व निर्माण करना है। यहाँ वैदिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा व भारतीय मूल्यों का ज्ञान भी छात्र-छात्रओं को प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यहाँ 3 से 5 साल के छोटे बच्चों ने गीता, पंचोपदेश, अष्टाध्यायी, धातुपाठ, लिंगानुशासन आदि कण्ठस्थ कर लिया है। उन्होंने कहा कि मेरे मन में हमेशा एक विचार रहा है कि हमारी वेद परम्परा, ऋषि परम्परा, ऋषि संस्कृति, योग, अध्यात्म व अध्यात्मवाद को भौतिकवाद से अधिक गौरव मिलना चाहिए। सीडीएस बिपिन रावत की दुर्घटना में मृत्यु पर स्वामी रामदेव ने शाजिश की आशंका जताई तथा उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न पुरस्कार प्रदान करने की मांग की। नन्हें बच्चों से शास्त्र श्रवण कर कार्ष्णी पीठाधीश्वर गुरु शरणानंद महाराज ने कहा कि आज जिस तरह से आप सबने हमें चारों खाने चित्त कर दिया है, हम आपसे हारकर अत्यंत प्रसन्न हैं। इनके बराबर तो हमें अब तक याद नहीं है। आप तो हमारे लिए प्रेरणा बन गए। 500 से 1000 सूत्र एक दिन में कण्ठस्थ करना ओलंपिक मैडल प्राप्त करने से भी बड़ी बात है। उन्होंने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि संस्कृति के विद्यार्थी अक्सर हीन भावना रखते हैं, आप स्वयं में गौरव की अनुभूति रखना, हम सरस्वती के वरद पुत्र हैं। नारी के सम्बंध में उन्होंने कहा कि इस धरा को बैकुण्ठ बनाने की क्षमता मात्र नारी में ही है। मनुस्मृति में कहा गया है कि ‘यत्र नार्यस्तु पुज्यंते रमंते तत्र देवताः।’ इसलिए यहाँ पतंजलि कन्या गुरुकुल को वरीयता दी गई, इसकी मुझे प्रसन्नता है।
आचार्य बालकृष्ण महाराज ने कहा कि जिन अभिभावकों ने अपने नन्हें-नन्हें बच्चों को वैदिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए गुरुकुलम् भेजा है उनका बहुत बड़ा दिल है। यहाँ से अष्टाध्यायी, धातुपाठ, पंचोपदेश, वेद, उपनिषद् आदि का ज्ञान प्राप्त कर ये बच्चे देश-विदेश में भारतीय ऋषि परम्परा की पताका फहराएँगे। पतंजलि गुरुकुलम् पराक्रमशील, राष्ट्रवादी, दूरदर्शी, आध्यात्मिक, एवं विनयशील मानव  शृंखला तैयार करेगा जो सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करेगी।
कार्यक्रम में जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज ने कहा कि हमारे सम्मुख बैठे छोटे-छोटे बच्चे भावी राष्ट्र निर्माता हैं। विदेशों में आज संस्कृत व भारतीय परम्पराओं को अपनाया जा रहा है किन्तु हमारे देश में लोग पाश्चात्यता की ओर भाग रहे हैं। पतंजलि गुरुकुलम् की स्थापना से भारतीय परम्पराओं व ऋषि संस्कृति को गौरव मिलेगा। वात्सल्य ग्राम की संस्थापिका दीदी माँ ऋतम्भरा पतंजलि गुरुकुलम् के भूमि पूजन का साक्षी बनना स्वयं में गौरव की बात है। बच्चों में ऐसे संस्कार देखकर मेरा हृदय गदगद है।
https://www.youtube.com/watch?v=9UXqF5iCcko
इस अवसर पर राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य गोविन्ददेव गिरि महाराज ने कहा कि संयमित जीवन व आध्यात्मिक दृष्टिकोण ही सफल जीवन का मार्ग है। प्राचीन गुरुकुलों की भाँति पतंजलि गुरुकुलम् के विद्यार्थीयों को यही संस्कार मिलेंगे, ऐसी मेरी आशा है। कार्यक्रम में साधना आश्रम, डुमेठ, ऋषिकेश से पूज्य स्वामी प्रेम विवेकानंद ने भी अपने विचार रखे। पूजन कार्य विशेष तौर पर काशी से पधारे प्रकाण्ड पण्डित  मनोजमणि त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष एन.पी. सिंह, पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति प्रो. महावीर, विश्वविद्यालय की कुलानुशासिका आचार्या साध्वी देवप्रिया, मुख्य महाप्रबंधक ललित मोहन, मुख्य केंद्रीय प्रभारी पतंजलि योग समिति  राकेश कुमार, आर्किटेक्ट पप्पू मौर्या, विश्वविद्यालय के डीन-अकेडमिक विनय कटियार, सहायक कुलानुशासक स्वामी परमार्थ देव, स्वामी आर्शदेव, स्वामी ईशदेव, स्वामी मित्रदेव, साध्वी देवमयी, साध्वी देवश्रुति, वैदिक गुरुकुलम् व वैदिक कन्या गुरुकुलम् के संन्यासी भाई व साध्वी बहनें तथा पतंजलि गुरुकुलम् के छात्र-छात्रएँ उपस्थित रहे।

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